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Monday, 13 January 2014

रविकर ले हित-साध, आप मत डर खतरे से-

खतरे से खिलवाड़ पर, कारण दिखे अनेक |
थूक थूक कर चाटना, घुटने देना टेक |

घुटने देना टेक, अगर हो जाए हमला |
होवे आप शहीद, जुबाँ पर जालिम जुमला |

भाजप का अपराध, उसी पर कालिख लेसे |
रविकर ले हित-साध, आप मत डर खतरे से ||

7 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,लोहड़ी कि हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  2. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (24-03-2014) को ''लेख़न की अलग अलग विद्याएँ'' (चर्चा मंच-1561) पर भी होगी!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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  3. बहुत सुन्दर !
    लेटेस्ट पोस्ट कुछ मुक्तक !

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  4. आपकी यह पोस्ट आज के (शुक्रवार, ११ अप्रैल, २०१४) ब्लॉग बुलेटिन - मसालेदार बुलेटिन पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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  5. बहुत ही खूब
    कैसे गया होगा
    पता नहीं चला
    उलूक से छूट :)

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  7. Very useful information. Thank you for sharing it. Thanks 99th.in

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