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Friday, 29 November 2013

टाल खरीद फरोख्त, करो दिल्ली की रच्छा-


हमने तो भोट डाल दिया आज ही 

अच्छा है यह फैसला, टाला सदन त्रिशंकु |
आप छोड़ते आप को, पैर पड़े नहीं पंकु |

पैर पड़े नहीं पंकु, हाथ का साथ निभाया |
दो बैलों का जोड़, लौट के घर को आया |

टाल खरीद फरोख्त, करो दिल्ली की रच्छा |
पाये बहुमत पूर्ण, यही तो सबसे अच्छा ||

Thursday, 28 November 2013

रहे हजारों वर्ष, सचिन पीपल सा दीखे-

(भावानुवाद )
दीखे पीपल पात सा, भारत रत्न महान |
त्याग-तपस्या ध्यान से, करे लोक कल्याण |

करे लोक कल्याण, निभाना हरदम होता |
विज्ञापन-व्यवसाय, मगर मर्यादा खोता |

थापित कर आदर्श, सकल जन गण मन सीखे |
रहे हजारों वर्ष, सचिन पीपल सा दीखे ||

Wednesday, 27 November 2013

नहीं छानना ख़ाक, बाँध कर रखो लंगोटा

केले सा जीवन जियो, मत बन मियां बबूल |
सामाजिक प्रतिबंध कुल, दिल से करो क़ुबूल |

दिल से करो क़ुबूल, अन्यथा खाओ सोटा  |
नहीं छानना ख़ाक, बाँध कर रखो लंगोटा |

दफ्तर कॉलेज हाट, चौक घर मेले ठेले |
रहो सदा चैतन्य, घूम मत कहीं अकेले | 

Monday, 25 November 2013

नित रविकर मनहूस, खाय धोखे पे धोखे-

धोखे देता जा रहा, कब से एक अनार |
सब्जबाग दिखला रहा, आम कई बीमार |

आम कई बीमार, बचे हैं ओस चाटकर |
ख़ास खा रहा खार, सदा अधिकार मारकर |

संसाधन ले चूस, प्रगति के सोते सोखे |
नित रविकर मनहूस, खाय धोखे पे धोखे ||

Sunday, 24 November 2013

अबला कहो जरूर, किन्तु रस्ता मत रोको-

रखिये तेज सहेजकर, खुराफात से दूर |
लोकपाल का गर्व भी, हो सकता है चूर |

हो सकता है चूर, घूर मत कन्याओं को |
अबला कहो जरूर, किन्तु रस्ता मत रोको |

किया कालिका क्रुद्ध, मजा करनी का चखिए |
लड़ो स्वयं से युद्ध,, स्वयं दुष्कृत्य परखिये || 


जमाली चाय दे स्वर्गिक आनंद का अहसास Best Herbal Tea

DR. ANWER JAMAL 









माली हालत देश की, होती जाय खराब |
आधी आबादी दुखी, आधी पिए शराब |

आधी पिए शराब, भुला दुःख अद्धा देता |
चारित्रिक अघ-पतन, गला अपनों का रेता |

रविकर कम्बल ओढ़, पिए नित घी की प्याली |
सुरा चाय पय छोड़, छोड़ता चाय जमाली || 

यौन उत्पीड़न किसे कहते हैं?

DR. ANWER JAMAL 






(1)
आगे मुश्किल समय है, भाग सके तो भाग |
नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग |

साथ फूस के आग, जागते रहना बन्दे |
हुई अगर जो चूक, झेल क़ानूनी फंदे |

जिनका किया शिकार, आज वे सारे जागे |
मिला जिन्हें था लाभ, नहीं वे आयें आगे ||


बंगारू कि आत्मा, होती आज प्रसन्न |
सन्न तहलका दीखता, झटका करे विपन्न |

झटका करे विपन्न, सताया है कितनों को |
लगी उन्हीं कि हाय, हाय अब माथा ठोको |

गोया गोवा तेज, चढ़ी थी जालिम दारू |
रंग दे डर्टी पेज, देखते हैं बंगारू || 

यौनोत्पीड़न के लिए, कुर्सी छोड़े आप |

कुर्सी छोड़े आप, मात्र छह महिना काहे |
सहकर्मी चुपचाप, बॉस जो उसका चाहे |

लेता आज संभाल, देख लेता कल कल का |
तरुण तेज ले पाल, सेक्स से मचे तहलका || 

दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |


दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |  
निबट सके जो ठीक से, राजा हो या रंक |

राजा हो या रंक, बढ़ी कितनी घटनाएं-
जब तब मारे डंक, इन्हें जल्दी निबटाएं |

तंतु तंतु में *तोड़, बड़े संकट में तन्त्रा |
कैसे रक्षण होय, देव कुछ दे दो मन्त्रा -

कुछ से हमको कुछ से तुमको, हमदर्दी यह घातक है |
सत्य सत्य सा नहीं ताकता, ऐसा दृष्टा पातक है |
अपनों में जो खोट दिखी तो, नजर उधर से फेर लिया-
गैरों का गिरेबान पकड़ ले, वही ब्लॉग पर स्नातक है  ||

"तेजपाल का तेज" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 









मिटटी करे पलीद अब, यही तरुण का तेज |

गलत ख्याल वो पाल के, छोड़े अपनी मेज |


छोड़े अपनी मेज, झुकाई कीर्ति पताका |
करता नहीं गुरेज, बना फिरता है आका |

करती महिला केस, हुई गुम सिट्टी पिट्टी |

सोमा ज्यादा तेज,  दोष पर डाले मिटटी ||

दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |


दो मंत्रालय दो बना, रेप और आतंक |                                             
निबट सके जो ठीक से, राजा हो या रंक |

राजा हो या रंक, बढ़ी कितनी घटनाएं-
जब तब मारे डंक, इन्हें जल्दी निबटाएं |

तंतु तंतु में *तोड़, बड़े संकट में तन्त्रा |
कैसे रक्षण होय, देव कुछ दे दो मन्त्रा -

Saturday, 23 November 2013

दिनभर बैठ निकालते, ये नरेश गर बाल-

दिनभर बैठ निकालते, ये नरेश गर बाल |
बनत बाल की खाल से, कम से कम इक नाल |

कम से कम इक नाल, लगा घोड़े को देते |
यू पी दुर्गति-काल, प्रगति पथ पर ले लेते |

व्यापारी पर व्यंग, मिलावट करता जमकर |
रहा चाय को कोस, बैठ बन्दा यह दिनभर ||

Friday, 22 November 2013

नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग-

यौन उत्पीड़न किसे कहते हैं?

DR. ANWER JAMAL 




(1)
आगे मुश्किल समय है, भाग सके तो भाग |
नहीं कोठरी में रखें, साथ फूस के आग |

साथ फूस के आग, जागते रहना बन्दे |
हुई अगर जो चूक, झेल क़ानूनी फंदे |

जिनका किया शिकार, आज वे सारे जागे |
मिला जिन्हें था लाभ, नहीं वे आयें आगे ||



बंगारू कि आत्मा, होती आज प्रसन्न |
सन्न तहलका दीखता, झटका करे विपन्न |

झटका करे विपन्न, सताया है कितनों को |
लगी उन्हीं कि हाय, हाय अब माथा ठोको |

गोया गोवा तेज, चढ़ी थी जालिम दारू |
रंग दे डर्टी पेज, देखते हैं बंगारू ||
यौनोत्पीड़न के लिए, कुर्सी छोड़े आप |

कुर्सी छोड़े आप, मात्र छह महिना काहे |
सहकर्मी चुपचाप, बॉस जो उसका चाहे |

लेता आज संभाल, देख लेता कल कल का |
तरुण तेज ले पाल, सेक्स से मचे तहलका ||

Wednesday, 20 November 2013

लाज लुटी, बस्ती बटी, दंगाई तदवीर-

दागी बंदूकें गईं, चमकाई शमशीर |
लाज लुटी, बस्ती बटी, दंगाई तदवीर |

दंगाई तदवीर, महत्वाकांक्षा खाई |
दिया-सलाई पाक, अगर-बत्ती सुलगाई |

सूत्रधार महफूज, जली तो धरा अभागी |
बने पाक इक पक्ष, बनाये दूजा दागी ||

Tuesday, 19 November 2013

अन्ना करे विलाप, हमारे धन से लड़ता-

लड़ता भ्रष्टाचार से, आज आप हित आप |
आप दुखी है बाप से, अन्ना से सन्ताप |

अन्ना से सन्ताप, चंद चंदे का चक्कर |
सदाचार संदिग्ध, हुआ है चेला शक्कर |

आंदोलन से आप, इलेक्शन खातिर बढ़ता |
अन्ना करे विलाप, हमारे धन से लड़ता ||

Monday, 18 November 2013

शीला का दुःख देखिये, शहजादे का क्रोध-

प्यासी बहनें जा रहीं, रुकने का अनुरोध |
शीला का दुःख देखिये, शहजादे का क्रोध |

शहजादे का क्रोध, मन:स्थित समझ करीबी |
करते रहते शोध, किन्तु नहिं ख़तम गरीबी |

रविकर देखें बोय, खेत में सत्यानाशी |
बढ़िया पैदावार, बहन पर भूखी-प्यासी ||


भाषण सुनकर जाइये, पूरी करिये साध |
एक घरी आधी घरी, आधी की भी आध |

आधी की भी आध, विराजे हैं शहजादे |
करिये वाद-विवाद, किन्तु सुनिये ये वादे |

शीला कहे पुकार, जानती यद्यपि कारण |
जाने को सरकार, फर्क डाले क्या भाषण || 

Sunday, 17 November 2013

पति प्रेमी पितु-मातु, करा सकते जासूसी-

छोरे ताकें छोरियां, वक्त करे आगाह |
मर्यादा मत भूलना, दुनिया रखे निगाह |

दुनिया रखे निगाह, शुरू है कानाफूसी |
पति प्रेमी पितु-मातु, करा सकते जासूसी |

फिर महिला आयोग, सूत्र यह सकल बटोरे |
दृष्टि-दोष कर दूर, बिगाड़े खेल छिछोरे ||

घात लगाए धूर्त, धराये हिन्दु-मुसलमाँ -

(1)
सतत धमाके में मरे, माँ के सच्चे पूत |
वह रैली देकर गई, पक्के कई सबूत |

पक्के कई सबूत, देश पर दाग बदनुमा |
घात लगाए धूर्त, धराये हिन्दु-मुसलमाँ |

माँ को देते बेंच, पाक से पैसा पाके |
पॉलिटिक्स के पेंच, कराएं सतत धमाके ||

(2)
रहमत लाशों पर नहीं, रहम तलाशो व्यर्थ |
अग्गी करने से बचो, अग्गी करे अनर्थ |

अग्गी करे अनर्थ, अगाड़ी जलती तीली |
जीवन-गाड़ी ख़ाक, आग फिर लाखों लीली |

करता गलती एक, उठाये कुनबा जहमत |
रविकर रोटी सेंक, बोलता जिन्दा रह मत ||

(3)
दिखा अंगूठा दे खुदा,  करता भटकल रोष |
ऊपर उँगली कर तभी, रहा खुदा को कोस |

रहा खुदा को कोस, उसे ही करे इशारा |
मारे कई हजार, कहाँ है स्वर्ग हमारा |

रविकर दिया जवाब, मिला जो जेल अनूठा |
यही तुम्हारा स्वर्ग, चिढ़ा तू दिखा अंगूठा ||  

(4)
गोदी में बैठा रखे, रहें पोषते नित्य |
उंगली डाले नाक में, कर विष्टा से कृत्य |

कर विष्टा से कृत्य, भिगोता रहा लंगोटी |
करता गोटी लाल, काटता लाल चिकोटी |

रविकर खोटी नीति, धमाके झेले मोदी |
यह आतंकी प्रीति, छुरी से काया गोदी || 

अटकल दुश्मन लें लगा, है चुनाव आसन्न |
बुरे दौर से गुजरती, सत्ता बांटे अन्न |

सत्ता बाँटे अन्न, पकड़ते हैं आतंकी |
आये दाउद हाथ, होय फिर सत्ता पक्की |

  हो जाए कल्याण, अभी तक टुंडा-भटकल |
पकड़ेंगे कुछ मगर, लगाते रविकर अटकल ||



होती है लेकिन यहाँ, राँची में क्यूँ खाज-

दंगे के प्रतिफल वहाँ, गिना गए युवराज |
होती है लेकिन यहाँ, राँची में क्यूँ खाज |

राँची में क्यूँ खाज, नक्सली आतंकी हैं |
ये आते नहिं बाज, हजारों जानें ली हैं |

अब सत्ता सरकार, हुवे हैं फिर से नंगे |
पटना गया अबोध, हुवे कब रविकर दंगे ||


हुक्कू हूँ करने लगे, अब तो यहाँ सियार |
कब से जंगल-राज में, सब से शान्त बिहार |

सब से शान्त बिहार, सुरक्षित रहा ठिकाना |
किन्तु लगाया दाग,  दगा दे रहा सयाना |

रहा पटाखे दाग, पिसे घुन पिसता गेहूँ |
सत्ता अब तो जाग, बंद कर यह हुक्कू हूँ -

Saturday, 16 November 2013

राज्य सभा का कर्ज, इधर मोदी भौकलवा -

वानखेड़े में राहुल

Bamulahija dot Com 






(1)
हुल्लड़ बाजी हो रही, राहुल रहे विराज |
सचिन हुवे आउट चलो, रैली में ले आज |

रैली में ले आज, बैट का देखें जलवा |
राज्य सभा का कर्ज, इधर मोदी भौकलवा |

मोदी मोदी शोर, भीड़ कर बैठी फाउल |
मौका अपना ताड़, भाग लेते हैं राहुल ||

(2)
चौका या छक्का नहीं, बड़ा देश परिवार |
मौका पा धक्का लगा, कर दे बेड़ा पार |

कर दे बेड़ा पार, वानखेड़े की गोदी |
अनायास ही शोर, हो रहा मोदी मोदी |

पूरे दो सौ टेस्ट, ऐतिहासिक था मौका |
सचिन नहीं वह और, लगाया जिसने चौका ||

Thursday, 14 November 2013

तू भी कर मत दान, सामने पा इक कपटी-

इक कप टी बिस्कुट सहित, सकता हमें खरीद |
फूड-सिक्युरिटी जब दिया, क्यूँ ना होवे ईद |

क्यूँ ना होवे ईद, हुआ मन रेगा अपना |
मिट्टी करे पलीद, विपक्षी सत्ता सपना |

हम तो सत्ता भक्त, खाय रेवड़ियां बटती |
तू भी कर मत दान, सामने पा इक कपटी |

Wednesday, 13 November 2013

छड पी एम दा ख़्वाब, अरे हलवाई हरिया-

जरिया रोटी का अगर, होवे चाय दुकान |
सदा बेचिए चाय ही, कर देना मत-दान |

कर देना मत-दान, नहीं नेता बन सकता |
बैठ जलेबी छान, कहाँ तू अलबल बकता |

छड पी एम दा ख़्वाब, अरे हलवाई हरिया ||
यस पी नेता तंग, कहे है तंग नजरिया |

Tuesday, 12 November 2013

सोना सोना स्वप्न, हुई शामिल दिल्ली भी-


बिल्ली को चुहिया मिली, कभी हुई थी दफ्न |

शेखचिल्लियों की चली, सोना सोना स्वप्न |


सोना सोना स्वप्न, हुई शामिल दिल्ली भी |

राजनीति-विज्ञान, लपलपा जाती जीभी |


देखे सारा विश्व, उड़ाये रविकर खिल्ली |

भूली गीता मर्म, शेख-चिल्ली की बिल्ली ||


Monday, 11 November 2013

मिला पाक से फैक्स, सफल भाजप की रैली -

 रैली पटना की सफल, सी एम् रहे बताय |
आतंकी धंधा नया, रैली सफल कराय |

रैली सफल कराय, नए अब कारोबारी |
आये नए चुनाव , नई ले रहे सुपारी |

देते सर्विस टैक्स, मिली पटना को थैली |
मिला पाक से फैक्स, सफल भाजप की रैली   || 

Sunday, 10 November 2013

रिश्ते में दुर्गन्ध, लाश भी तू ही रख ले-

खले खोखला खल-खलल, खारिज खाली खाम |
बिन खोले ही पढ़ लिया, जो आया पैगाम |

जो आया पैगाम, शराफत रविकर छोड़े  |
नित्य वसूले दाम, बाँह भी रोज मरोड़े |

बदले अब सम्बन्ध, ले चुकी सौ सौ बदले |
रिश्ते में दुर्गन्ध, लाश भी तू ही रख ले ||

Saturday, 9 November 2013

इक ठो काना पाय, बना दें राजा, अंधे-

अंधे बाँटे रेवड़ी, लगती हाथ बटेर |
अन्न-सुरक्षा काम भी, मनरेगा का फेर |

मनरेगा का फेर, काम बिन मिले कमीशन |
नगरी में अंधेर, किन्तु मन भावे शासन |

पाई अंधी अक्ल, बंद कर 'रविकर' धंधे |
इक ठो काना पाय, बना दें राजा, अंधे ||

Friday, 8 November 2013

सूबे में दंगे थमे, खुलती पाक दुकान -

मंशा मनसूबे सही, लेकिन गलत बयान |
सूबे में दंगे थमे, खुलती पाक दुकान |

खुलती पाक दुकान, सजा दे मंदिर मस्जिद |
लेती माल खरीद, कई सरकारें संविद |

नीर क्षीर अविवेक, बने जब कौआ हंसा |
रहे गधे अब रेक, जगाना इनकी मंशा ||


मंशा पर करते खड़े, क्यूँ आयोग सवाल । 
भल-मन-साहत देखिये, देख लीजिये चाल । 

देख लीजिये चाल, मिले शाबाशी पुत्तर । 
होता मुन्ना पास,चार पन्ने का उत्तर । 

पुन: मुज्जफ्फर नगर, करूँ क्यूँकर अनुशंसा ।
उधर इरादा पाक, इधर इनकी जो मंशा ॥ 

Thursday, 7 November 2013

चट्टे बट्टे एक, दाँव दे जाते झूठे-

झूठे *दो दो चोंच हों, दिखे चोंचलेबाज |
बाज कबूतर से लड़े, फिर भी नखरे नाज |
*कहासुनी 

फिर भी नखरे नाज, नहीं पंजे को अखरे |
जन का बहता रक्त, देख कर हँसे मसखरे |

है चुनाव कि रीति, दीखते रूठे रूठे |
चट्टे बट्टे एक, दाँव दे जाते झूठे ||

Wednesday, 6 November 2013

तक्षशिला में ढूंढते, मूर्ख आज तक खोट -

लगे पलीते दर्जनों, होंय सतत विस्फोट |
तक्षशिला में ढूंढते, मूर्ख आज तक खोट |

मूर्ख आज तक खोट, लड़े थे चन्द्रगुप्त-रण |
पकड़ शब्दश: तथ्य, भूल ना पाते भाषण |

कह रविकर एहसास, सभा भगदड़ बिन बीते |
भूल परिस्थित-जन्य, अगर हों लगे पलीते ||

घटनाएं जब यकबयक, होंय खड़ी मुँह फाड़ |
असमंजस में आदमी, काँप जाय दिल-हाड़ |

काँप जाय दिल-हाड़, बचाना लेकिन जीवन |
आये  लाखों लोग, जहाँ सुनने को भाषण |

कर तथ्यों की बात, गलतियां ढूंढे पटना |
सह मोदी आघात, सँभाले प्रति-दुर्घटना ||


खीरा-ककड़ी सा चखें, हम गोली बारूद |

पचा नहीं पटना सका, पर अपने अमरूद |

पर अपने अमरूद, जतन से पेड़ लगाये |
लिया पाक से बीज, खाद ढाका से लाये |

बिछा पड़ा बारूद, उसी पर बैठ कबीरा |
बने नीति का ईश, जमा कर रखे जखीरा ||

Friday, 25 October 2013

*कसंग्रेस भी आज, करें दंगों का धंधा

अन्धा बन्दर बोलता, आंके बन्दर मूक |
गूंगा बन्दर पकड़ ले, हर भाषण की चूक |

हर भाषण की चूक, हूक गांधी के दिल में  |
मार राख पर फूंक, लगाते लौ मंजिल में  |

*कसंग्रेस भी आज, करें दंगों का धंधा |
मत दे मत-तलवार, बनेगा बन्दर अन्धा ||

* जैसा राहुल के इंदौर के कार्यक्रम के पोडियम पर लिखा था-


नक्सल आतंकी कहीं, फिर ना जायें कोप |
शान्ति-भंग रैली करे, सत्ता का आरोप |

सत्ता का आरोप, निभाता नातेदारी |
विस्फोटक पर बैठ, मस्त सरकार बिहारी |

दशकों का अभ्यास, सँभाले रक्खा भटकल |
रैली से आतंक, इलेक्शन से हैं नक्सल ||
पारा-पारी ब्लास्ट, महज छह जान गई है-

रविकर-पुंज
*फेलिन करता फेल जब, मनसूबे आतंक |
बिना आर.डी.एक्स के, हल्का होता डंक |

हल्का होता डंक, सुपारी फेल हुई है |
पारा-पारी ब्लास्ट, महज छह जान गई है |

कृपा ईश की पाय, कहाँ फिर मोदी मरता -
आई एस आई चाल, फेल यह फेलिन करता ||

WEDNESDAY, 30 OCTOBER 2013

देता शौचालय बचा, मोदी जी की जान-

रविकर लखनऊ में २०-१०-१३ : फ़ोटो मनु
देता शौचालय बचा, मोदी जी की जान |
अभी अभी जो दिया था, तगड़ा बड़ा बयान |

तगड़ा बड़ा बयान, प्रथम शौचालय आये |
पीछे देवस्थान, गाँव आदर्श बनाये |

मानव-बम फट जाय, और बच जाता नेता |
शौचालय जय जयतु, बधाई रविकर देता ||