Follow by Email

Thursday, 28 July 2016

रखे बुद्धि पर किन्तु, बचा जो पत्थर पहले-

पहले तो करते रहे, अब होती तकलीफ।
बेगम बोली क्यों नहीं, मियां करे तारीफ।
मियां करे तारीफ, संगमरमर सी काया।
पत्थर एक तराश, प्रभू! क्या खूब बनाया।
चला फूँकने प्राण, किन्तु कर बाल सुनहले।
था पत्थर जो शेष, अक्ल पर रख दे पहले।

Monday, 25 July 2016

दर्द हार गम जीत, व्यथा छल आंसू हाँसी -


उदासीनता की तरफ, बढ़ते जाते पैर ।
रोको रविकर रोक लो, जीवन से क्या बैर । 
जीवन से क्या बैर, व्यर्थ ही जीवन त्यागा ।
कर अपनों को गैर, अभागा जग से भागा |
दर्द हार गम जीत, व्यथा छल आंसू हाँसी ।
जीवन के सब तत्व, जियो जग छोड़ उदासी ।।

रखे परस्पर ख्याल, नजर फिर कौन लगाता

जल के जल रक्षा करे, जले नहीं तब दुग्ध।
गिरे अग्नि पर उबलकर, दुग्ध कर रहा मुग्ध।
दुग्ध कर रहा मुग्ध, मूल्य जल का बढ़ जाता।
रखे परस्पर ख्याल, नजर फिर कौन लगाता।
आई बीच खटास, दूध फट जाय उबल के।
जल भी मिटता जाय, आग पर रविकर जल के।।

Monday, 18 July 2016

नीति-नियम-आदर्श, हवा के ताजे झोंके

प्रश्नों के उत्तर कठिन, नहीं आ रहे याद |

स्वार्थ-सिद्ध मद-मोह-सुख, भोगवाद-उन्माद |

भोगवाद-उन्माद , नशे में बहके बहके |

लेते रहते स्वाद, अनैतिक चीजें गहके |

नीति-नियम-आदर्श, हवा के ताजे झोंके |

चौथेपन में आज, लिखूँ उत्तर प्रश्नों के ||

Wednesday, 13 July 2016

मम्मी कहती आय, बाप बेटे इक जैसे-

कैसे थप्पड़ मारता, झूठे को रोबोट।
पेट दर्द के झूठ पे, बच्चा खाये चोट।

बच्चा खाये चोट, कभी मैं भी था बच्चा।
कहा कभी ना झूठ, बाप को पड़ा तमाचा।

मम्मी कहती आय, बाप बेटे इक जैसे।
थप्पड़ वह भी खाय, बताओ रविकर कैसे।।

Friday, 8 July 2016

रहा आयते पूछ, सुना पाये ना भोले

चिमटा अब लाता नहीं, माँ के लिए हमीद।
ऑटोमैटिक गन चला, रहा मनाता ईद।

रहा मनाता ईद, खरीदे थे हथगोले।
रहा आयते पूछ, सुना पाये ना भोले।

देता गर्दन काट, उन्हें झट देता निपटा।
ईदगाह में जाय, ख़रीदे काहे चिमटा।।

Tuesday, 5 July 2016

रचना कर भगवान की, खुश होता इन्सान -

रचना कर इन्सान की, दुखी दिखा भगवान |
रचना कर भगवान की, खुश होता इन्सान |

खुश होता इन्सान, शुरू हैं गोरख-धंधे |
अरबों करते दान, अक्ल के पैदल अंधे |

फिर हो भोग-विलास, किन्तु रविकर तू बचना |
लेकर उसका नाम, लूटते उसकी रचना ||